8th Pay Commission – नई दिल्ली। केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंता इन दिनों उनकी सेवानिवृत्ति के बाद की आर्थिक सुरक्षा बन चुकी है। 8वें वेतन आयोग के गठन की प्रक्रिया जैसे ही आगे बढ़ी, कर्मचारी संगठनों ने एक बार फिर पुरानी पेंशन योजना यानी OPS को वापस लाने की मांग बुलंद कर दी है। यह मसला अब महज एक यूनियन की मांग नहीं रहा — यह लाखों सरकारी कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा एक अहम सवाल बन चुका है।
कर्मचारी संगठनों ने सरकार को सौंपी अपनी मांगें
केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और श्रमिकों का परिसंघ तथा अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी संघ (AIDEF) ने राष्ट्रीय परिषद-संयुक्त परामर्श तंत्र (NC-JCM) की स्टाफ साइड ड्राफ्टिंग कमेटी के सामने अपनी मांगों का पूरा खाका रख दिया है। इन संगठनों की मांग एकदम स्पष्ट है — नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन सिस्टम (UPS) दोनों को तत्काल समाप्त किया जाए और पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पूर्ण रूप से बहाल किया जाए।
UPS को मिला ठंडा स्वागत, सिर्फ 4-5% कर्मचारियों ने अपनाया
सरकार ने जब UPS को एक बेहतर विकल्प के रूप में पेश किया, तो उम्मीद थी कि कर्मचारी इसे हाथों-हाथ लेंगे। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग निकली। सरकार ने खुद संसद में बताया कि 30 नवंबर 2025 तक केवल 1,22,123 केंद्रीय कर्मचारियों ने ही UPS का विकल्प चुना — जबकि इसके पात्र कर्मचारियों की कुल संख्या लगभग 23 से 25 लाख के बीच आंकी जाती है।
यानी कुल पात्र कर्मचारियों में से मात्र 4 से 5 प्रतिशत ने ही नई व्यवस्था को स्वीकार किया। इस आंकड़े में नई भर्ती, सेवारत और कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारी भी शामिल हैं। बाकी 95 प्रतिशत से ज्यादा कर्मचारियों का UPS से मुंह मोड़ना इस बात का साफ संकेत है कि नई व्यवस्था में उनका विश्वास नहीं है।
क्यों चाहते हैं कर्मचारी OPS की वापसी?
यूनियन नेताओं का तर्क है कि OPS में रिटायरमेंट के बाद सुनिश्चित आय मिलती थी। अंतिम वेतन का करीब 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलता था और उसके साथ महंगाई भत्ता (DA) भी जुड़ा होता था। इससे सेवानिवृत्त कर्मचारी को पता होता था कि उसे हर महीने कितनी राशि मिलेगी।
वहीं NPS में पेंशन की राशि शेयर बाजार और निवेश के रिटर्न पर निर्भर करती है। बाजार की अनिश्चितता के कारण यह पेंशन घट-बढ़ सकती है, जिससे वृद्धावस्था में आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है। यही कारण है कि लाखों कर्मचारी NPS को अपनी सेवानिवृत्ति के लिए उपयुक्त नहीं मानते।
सरकार का क्या है रुख?
सरकार ने अब तक अपना पक्ष स्पष्ट रखा है। केंद्र के अनुसार OPS को दोबारा लागू करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार का मानना है कि पुरानी पेंशन व्यवस्था सरकारी खजाने पर दीर्घकालिक वित्तीय बोझ डालती है, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए टिकाऊ नहीं है। इसी सोच के साथ NPS को जारी रखते हुए UPS के रूप में एक मध्यमार्ग निकाला गया, जिसमें न्यूनतम पेंशन की कुछ गारंटी दी गई है।
8वें वेतन आयोग में पेंशन बनेगा सबसे बड़ा मुद्दा
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे 8वें वेतन आयोग की कार्यवाही आगे बढ़ेगी, पेंशन का यह विवाद और गहरा होता जाएगा। एक तरफ कर्मचारी संगठन पूरी ताकत से OPS की बहाली की मांग को आयोग के सामने रखने की तैयारी कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार वित्तीय अनुशासन और राजकोषीय जिम्मेदारी का हवाला देकर NPS की जरूरत को सही ठहरा रही है।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 8वां वेतन आयोग पेंशन के इस पेचीदे मसले पर क्या सिफारिश करता है और सरकार आखिरकार कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति सुरक्षा को लेकर कौन सा रास्ता चुनती है।









