hailstorms and rain – होली के बाद मौसम ने एक बार फिर करवट लेनी शुरू कर दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के ताजा आकलन के मुताबिक, लगातार सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभों और चक्रवाती हवाओं के प्रभाव के चलते 19 और 20 मार्च को देश के अधिकांश हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियाँ जोर पकड़ेंगी। जहाँ बीते कुछ दिनों में मौसम शांत और शुष्क बना रहा, वहीं अब अगले 72 से 96 घंटों में उत्तर भारत के पहाड़ों से लेकर दक्षिणी राज्यों तक बादल, बारिश और ओलावृष्टि का दौर शुरू होने की प्रबल संभावना है।
उत्तर भारत में पहाड़ों से मैदानों तक असर
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 18 मार्च से जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश की ऊँची पर्वत श्रृंखलाओं पर बर्फबारी और बारिश की शुरुआत होगी, जो 19 मार्च तक और तीव्र हो सकती है। इस पश्चिमी विक्षोभ का सीधा असर मैदानी इलाकों पर भी पड़ेगा।
20 मार्च को पंजाब के अमृतसर, लुधियाना और पटियाला सहित हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना है। उत्तर प्रदेश की बात करें तो पश्चिमी जिले जैसे आगरा, मेरठ और अलीगढ़ 19 मार्च को और पूर्वी जिले जैसे प्रयागराज व वाराणसी 20 मार्च को मौसमी बदलाव की चपेट में आ सकते हैं।
राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में भी अलर्ट
पश्चिमी भारत में राजस्थान के रेतीले इलाकों — जैसलमेर, जोधपुर और बाड़मेर — में 18 मार्च को धूल भरी आंधी का सामना करना पड़ सकता है। इसके बाद 20 मार्च तक पूरे राजस्थान में बारिश के आसार हैं।
मध्य प्रदेश के नीमच, गुना, भोपाल और इंदौर जैसे जिलों में 19 मार्च से बादल घिरना शुरू होंगे और ओलावृष्टि की भी आशंका जताई गई है। गुजरात के प्रमुख शहरों — अहमदाबाद, वडोदरा और सूरत — में भी लंबे शुष्क मौसम के बाद 19 मार्च को बारिश होने की उम्मीद है।
महाराष्ट्र और दक्षिणी राज्यों में गरज-चमक के साथ बौछारें
महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों में 18 से 20 मार्च के बीच अच्छी बारिश होने की संभावना है। नागपुर और अमरावती में ओले गिरने से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कई जिलों में 19 और 20 मार्च को गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ सकती हैं।
पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में लंबे समय तक बारिश
असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश सहित पूर्वोत्तर के राज्यों में 21 मार्च तक लगातार बारिश का सिलसिला बना रहेगा। बिहार और झारखंड के उन जिलों में जो उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे हैं, वहाँ 19-20 मार्च को कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है।
किसान भाइयों के लिए जरूरी सलाह
इस बदलते मौसम का सबसे अधिक असर खेतों में खड़ी रबी फसलों, खासकर गेहूँ पर पड़ सकता है। तेज हवाओं से फसल के गिरने और ओलों से दानों के क्षतिग्रस्त होने की आशंका को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि जिनकी फसल पककर तैयार हो चुकी है, वे 20 मार्च से पहले कटाई और मड़ाई का काम पूर्ण कर लें तथा अनाज को सुरक्षित भंडारण स्थलों पर पहुँचा दें।
कब मिलेगी राहत?
मौसम विभाग के अनुसार, 21 मार्च से उत्तर और पश्चिम भारत में आसमान धीरे-धीरे साफ होने लगेगा। हालाँकि, पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में बारिश का दौर कुछ और दिनों तक बना रह सकता है।









