Gold price – नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद सोने की कीमतें उस रफ्तार से नहीं दौड़ पाईं, जिसकी निवेशकों को उम्मीद थी। बीते हफ्ते घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना करीब ₹1,61,675 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ। यह भाव अपने सर्वकालिक उच्च स्तर ₹1,80,779 प्रति 10 ग्राम से अभी भी करीब ₹19,000 नीचे बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भी तस्वीर कुछ ऐसी ही रही। न्यूयॉर्क के कॉमेक्स बाजार में सोना लगभग $5,158 प्रति ट्रॉय औंस पर बंद हुआ, जबकि इसका रिकॉर्ड हाई $5,626.80 रहा है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद सोना फिलहाल एक सीमित दायरे में ही घूम रहा है।
डॉलर की मजबूती बन रही है सोने की सबसे बड़ी रुकावट
जानकारों के अनुसार इस समय सोने की राह में सबसे बड़ी अड़चन मजबूत होता अमेरिकी डॉलर है। कच्चे तेल की कीमतों में आई उछाल के कारण डॉलर इंडेक्स एक बार फिर 100 के करीब पहुंच रहा है। वित्तीय बाजार में एक आम सिद्धांत है — जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोने की चमक फीकी पड़ जाती है। यही कारण है कि अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध जैसे हालात बनने के बाद भी सोने में अपेक्षित उछाल देखने को नहीं मिला।
फिर भी बनी रहेगी सुरक्षित निवेश की मांग
बाजार विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि दुनिया भर में छाई राजनीतिक अनिश्चितता के चलते सोने की ‘सेफ हेवन’ यानी सुरक्षित निवेश वाली मांग आगे भी बरकरार रह सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक विदेश नीति और ईरान के बाद क्यूबा जैसे देशों पर भी सख्ती के संकेतों ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता को बढ़ा दिया है। ऐसे माहौल में निवेशक परंपरागत रूप से सोने और चांदी जैसी परिसंपत्तियों की ओर रुख करते हैं, जो इसे नीचे गिरने से रोकती है।
महंगाई और ब्याज दरें भी हैं बड़ा कारक
तेल की बढ़ती कीमतें दुनिया भर में महंगाई की वापसी का खतरा फिर से खड़ा कर रही हैं। इसी के चलते अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व से जल्द ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद अब लगभग धुंधली पड़ गई है। बाजार में अब यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अगली संभावित दर कटौती सितंबर या अक्टूबर 2025 से पहले शायद न हो। जब तक ब्याज दरें ऊंची रहेंगी और डॉलर मजबूत बना रहेगा, तब तक सोने में किसी बड़ी छलांग की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।
किस रेंज में रहेगा सोना, क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार निकट भविष्य में घरेलू बाजार में सोना ₹1,37,000 से ₹1,65,000 प्रति 10 ग्राम के बड़े दायरे में कारोबार कर सकता है। यदि कीमतें ₹1,65,000 के स्तर के ऊपर टिककर बंद होने लगें, तो एक नई और ताकतवर तेजी का रास्ता खुल सकता है।
वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में $5,200 प्रति ट्रॉय औंस का स्तर अहम माना जा रहा है। अगर सोना इस बाधा को पार कर मजबूती से टिकता है, तो $5,400 से $5,600 तक का सफर तय किया जा सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
दीर्घकालिक निवेश के नजरिए से बाजार विशेषज्ञ मौजूदा गिरावट को खरीदारी का अवसर मान रहे हैं। उनका कहना है कि दुनिया के केंद्रीय बैंकों की सोने में लगातार खरीदारी, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग — ये तीनों कारक मिलकर सोने को लंबे समय तक मजबूत बनाए रख सकते हैं। इसलिए अगर कीमतों में थोड़ी और गिरावट आती है, तो उसे घबराहट नहीं बल्कि धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने के मौके के रूप में देखना चाहिए।









